लक्ष्मी माताजी की कहानी । Laxmi Mata story 03

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एक गांव में एक साहूकार रहता था। साहूकार के एक बेटी थी । वह प्रतिदिन पीपल सींचने जाती थी । पीपल के वृक्ष में लक्ष्मी जी निवास करती थी | पीपल में से लक्ष्मी जी प्रकट होती थी और चली जातीं । एक दिन लक्ष्मी जी ने साहूकार की बेटी से कहा – तू मेरी सहेली बन जा ।

तब लड़की ने कहा कि मैं अपने पिता से पूछकर कल बताउंगी | साहूकार की बेटी ने घर जाकर अपने पिता को सारी बात बता दी । तब उसके पिताजी बोले वह तो लक्ष्मी जी हैं । तू तो लक्ष्मी जी की बात मान ले | अपने को और क्या चाहिए तू लक्ष्मी जी की सहेली बन जा । दूसरे दिन वह लड़की फिर गईं । तब लक्ष्मी जी पीपल के पेड़ से निकल कर आई और कहा सहेली बन जा तो लड़की ने कहा , बन जाऊंगी और दोनों पक्की सहेलीया बन गई । लक्ष्मी जी ने शेली से खा सखी तू कल मेरे घर भोजन पर आना |

लक्ष्मी माताजी की कहानी
लक्ष्मी माताजी की कहानी
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भोजन का न्योता दिया । घर आकर लड़की ने मां – पिताजी को कहा कि मेरी सहेली लक्ष्मी जी ने मुझे खाने का न्योता दिया है । तब लडकी के पिता ने कहा कि सहेली के जीमने जाइयो पर घर को संभाल कर जाना । तब वह लक्ष्मी जी के यहां जीमने गई तो लक्ष्मी जी ने उसे शाल ओढ़ने के लिए दिया , रुपये दिये , सोने की चौकी , सोने की थाली में छत्तीस प्रकार का भोजन जिमाँ दिए |

लक्ष्मी माताजी की कहानी । Laxmi Mata story 03

जीम कर जब वह जाने लगी तो लक्ष्मी जी ने पल्ला पकड़ लिया और कहा कि हे सखी में भी तेरे घर जीमने आऊंगी । तो उसने कहा सखी जरुर आना । वह घर जाकर चुपचाप बैठ गई । तब पिता ने पूछा कि बेटी सहेली के यहां जीमकर आ गईं ? और तू उदास क्यों बैठी है ? तो उसने कहा पिताजी मेरे को लक्ष्मी जी ने इतना दिया अनेक प्रकार के भोजन कराए परन्तु मैं कैसे जिमाऊंगी ? उनकी इस्ति आव भगत कैसे करूंगी अपने घर में तो कुछ भी नहीं है ।

तब उसके पिता जी ने कहा कि गायण के गोबर पिली मिट्टी से चौका लगाकर घर की सफाई कर लेना । चार मुख वाला दीया जलाकर लक्ष्मीजी का नाम लेकर रसोई में बैठ जाना।लडकी पिताजी के कहे अनुसार लड़की सफाई करके लड्डू लेकर बैठ गई ।

उसी समयउस नगर की रानी नहा रही थी । उसका नौलखा हार चील उठा कर ले गई और लडकी के घर वह नौलखा हार डाल गई और उसके लड्डु ले गई बाद में वह हार को लेकर बाजार में गई और सामान लाने लगी तो सुनार ने पूछा कि क्या चाहिए ? तब उसने कहा कि सोने की चौकी , सोने का थाल ,लाल चुनरी दे दें , मोहरे दें और सामग्री दें । छत्तीस प्रकार का भोजन हो जाए इतना सामान दें । सारी चीजें लेकर बहुत तैयारी करी और रसोई बनाई | फिर लक्ष्मी जी को बुलाया आगे – आगे गणेशजी और पीछे – पीछे लक्ष्मीजी आई ।

लक्ष्मी माताजी की कहानी । Laxmi Mata story 03

उसने फिर चौकी पर आसन बिछाया और कहा , सहेली चौकी पर बैठ जा । जब लक्ष्मी जी ने कहा सहेली चौकी पर तो राजा महाराजा के भी नहीं बैठी , किसी के भी नहीं बैठी तो उसने कहा कि मेरे यहां तो सखी बैठना पड़ेगा तो ब फिर लक्ष्मीजी चौकी पर बैठ गई । तब उसने बहुत खातिर की । जैसे लक्ष्मी ने करी थी ,

वैसे ही उसने करी ।लक्ष्मीजी उस पर खुश हो गईं । घर में खूब अन्न धन के भंडार भर गये । और लक्ष्मी जी ने आशीर्वाद दिया की जो कोई भी लक्ष्मी जी की बैठी हुई तस्वीर की पूजा करेंगे उसके घर में माँ लक्ष्मी सदैव निवास करेगी | हे लक्ष्मीजी जैसा तुमने साहूकार की बेटी को दिया वैसा सबको देना ।

लक्ष्मी माताजी की कहानी
लक्ष्मी माताजी की कहानी

कहते सुनते , हुंकारा भरते अपने सारे परिवार को दियो । पीहर में देना , ससुराल में देना । बेटे पोते को देना । है लक्ष्मी माता ! सबका कष्ट दूर करना , दरिद्रता दूर करना , सबकी मनोकामना पूर्ण करना । दोस्तो अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई है तो कॉमेंट जरूर करे दोस्तो।

महादेव जी को ठग लिया, Mahadev ko thag liya

ये बात बहुत ही पुरानी है, एक गांव में जिसका नाम महिपालपुर था एक अंधी बुढ़िया रहती थी. वह शिव जी की परम भक्त थी. आंखों से भले ही दिखाई नहीं देता था, परंतु वह सुबह शाम शिव जी की बंदगी में मग्न रहती. शिव जी बुढ़िया की भक्ति से बड़े प्रसन्न हुए. उन्होंने सोचा यह बुढ़िया नित्य हमारा स्मरण करती है,

परंतु बदले में कभी कुछ नहीं मांगती.भक्ति का फल तो उसे मिलना ही चाहिए. ऐसा सोचकर शिव जी एक दिन बुढ़िया के सम्मुख प्रकट हुए तथा बोले, माई, तुम हमारी सच्ची भक्त हो.

जिस श्रद्धा व विश्वास से हमारा स्मरण करती हो, हम उससे प्रसन्न हैं. अत: तुम जो वरदान चाहो, हमसे मांग सकती हो. बुढ़िया बोली, प्रभो. मैं तो आपकी भक्ति प्रेम भाव से करती हूं मांगने का तो मैंने कभी सोचा ही नहीं. अत: मुझे कुछ नहीं चाहिए. शिव जी पुन: बोले, हम वरदान देने केलिए आए हैं. बुढ़िया बोली, मुझे मांगना तो नहीं आता.

अगर आप कहें, तो मैं कल मांग लूंगी. तब तक मैं अपने बेटे व बहू से भी सलाह कर लूंगी. शिव जी कल आने का वादा करके वापस लौट गए. बुढ़िया का एक पुत्र व बहू थे. बुढ़िया ने सारी बात उन्हें बताकर सलाह मांगी. बेटा बोला, मां, तुम शिव जी से ढेर सारा पैसा मांग लो.

महादेव जी को ठग लिया, Mahadev ko thag liya

हमारी ग़रीबी दूर हो जाएगी. सब सुख चैन से रहेंगे. बुढ़िया की बहू बोली, नहीं आप एक सुंदर पोते का वरदान मांगें. वंश को आगे बढ़ाने वाला भी, तो चाहिए. बुढ़िया बेटे और बहू की बातें सुनकर असमंजस में पड़ गई. उसने सोचा, यह दोनों तो अपने,अपने मतलब की बातें कर रहे हैं. बुढ़िया ने पड़ोसियों से सलाह लेने का मन बनाया. पड़ोसन भी नेक दिल थी. उसने बुढ़िया को समझाया कि तुम्हारी सारी ज़िंदगी दुखों में कटी है.

लक्ष्मी माताजी की कहानी
लक्ष्मी माताजी की कहानी

अब जो थोड़ा जीवन बचा है, वह तो सुख से व्यतीत हो जाए. धन अथवा पोते का तुम क्या करोंगी. अगर तुम्हारी आंखें ही नहीं हैं, तो यह संसारिक वस्तुएं तुम्हारे लिए व्यर्थ हैं. अत: तुम अपने लिए दोनों आंखें मांग लो. बुढ़िया घर लौट आई. बुढ़िया और भी सोच में पड़ गई. उसने सोचा, कुछ ऐसा मांग लूं, जिससे मेरा, बहू व बेटे, सबका भला हो.

but ऐसा क्या हो सकता है. बुढ़िया कभी कुछ मांगने का मन बनाती, तो कभी कुछ. परंतु कुछ भी निर्धारित न कर सकी. दूसरे दिन शिव जी पुन: प्रकट हुए तथा बोले,

आप जो भी मांगेंगे, वह हमारी कृपा से हो जाएगा. यह हमारा वचन है. शिव जी के पावन वचन सुनकर बुढ़िया बोली, यदि आप मुझसे प्रसन्न हैं, तो कृप्या मुझे मन इच्छित वरदान दीजिए. मैं अपने पोते को सोने के गिलास में दूध पीते देखना चाहती हूं. बुढ़िया की बातें सुनकर शिव जी उसकी सादगी व सरलता पर मुस्कुरा दिए. बोले, तुमने तो मुझे ठग ही लिया है. मैंने तुम्हें एक वरदान मांगने के लिए बोला था,

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परंतु तुमने तो एक वरदान में ही सब कुछ मांग लिया. तुमने अपने लिए लंबी उम्र तथा दोनों आंखे मांग ली हैं. बेटे के लिए धन व बहू के लिए पोता भी मांग लिया. पोता होगा, ढेर सारा पैसा होगा, तभी तो वह सोने के गिलास में दूध पीएगा. पोते को देखने के लिए तुम जिंदा रहोगी, तभी तो देख पाओगी. अब देखने के लिए दो आंखें भी देनी ही पड़ेंगी. फिर भी वह बोले, जो तुमने मांगा, वे सब सत्य होगा.

महादेव जी को ठग लिया, Mahadev ko thag liya

यूं कहकर शिव जी अंर्तध्यान हो गए. कुछ समय पाकर शिव जी की कृपा से बुढ़िया के घर पोता हुआ. बेटे का कारोबार चल निकला तथा बुढ़िया की आंखों की रौशनी वापस लौट आई. बुढ़िया अपने परिवार सहित सुख पूर्वक जीवन व्यतीत करने लगी. तो दोस्तों इस प्रकार से एक बुढ़िया ने शिव जो को आखिर मैं ठग ही लिया

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लक्ष्मी माताजी की कहानी
लक्ष्मी माताजी की कहानी

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